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“मैं तिरे जिस्म के जब पार निकल जाऊँगा वस्ल की रात बड़ी ग़ौर-तलब होगी वो” — TRIPURARI
मैं तिरे जिस्म के जब पार निकल जाऊँगा
वस्ल की रात बड़ी ग़ौर-तलब होगी वो
“मैं तिरे जिस्म के जब पार निकल जाऊँगा वस्ल की रात बड़ी ग़ौर-तलब होगी वो” — TRIPURARI