Quote image editor
“भारत में साहित्य, समाज का आईना नहीं होता, हो ही नहीं सकता. आईने भी कभी ब्राहमण, क्षत्रिय, वैश्य, हिंदू, मुसलमान, पारसी हो सकते हैं ? आईना तो ख़ालिस नास्तिक ही हो सकता है. -संजय ग्रोवर Sanjay Grove” — संजय ग्रोवर Sanjay Grover
भारत में साहित्य, समाज का आईना नहीं होता, हो ही नहीं सकता.
आईने भी कभी ब्राहमण, क्षत्रिय, वैश्य, हिंदू, मुसलमान, पारसी हो सकते हैं ?
आईना तो ख़ालिस नास्तिक ही हो सकता है.
-संजय ग्रोवर Sanjay Grove