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“प्रेम यदि निस्वार्थ हो, सीता तभी संग होगी, पूर्ण निष्ठा समर्पण से ही, ये धनु भंग होगी। संभवतः यह पवित्र प्रेम की उसी शक्ति की पराकाष्ठा थी, जिसने श्रीराम को पाँच दिवस में महासागर पर सेतु बांधने का सामर्थ्य दिया था अथवा आज फिर वही संकल्प-शक्ति प्रकट हो गयी थी, जिसने युगों पहले रघुवंशियों को अजेय बना दिया था।” — Pradyumna Kumar Tiwari
प्रेम यदि निस्वार्थ हो, सीता तभी संग होगी,
पूर्ण निष्ठा समर्पण से ही, ये धनु भंग होगी।
संभवतः यह पवित्र प्रेम की उसी शक्ति की पराकाष्ठा थी, जिसने श्रीराम को पाँच दिवस में महासागर पर सेतु बांधने का सामर्थ्य दिया था अथवा आज फिर वही संकल्प-शक्ति प्रकट हो गयी थी, जिसने युगों पहले रघुवंशियों को अजेय बना दिया था।