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“पता नही कितना कुछ उसके साथ हुआ, प्रशंसा और अपमान, संकट और सुरक्षा, पर वह किसी बात से आहत नही हुआ । ऐसा नही कि वह संवेदनहीन और अबोध था । बल्कि उसके मन मे अपने बारे मे कोई छवि नही थी, कोई निष्कर्ष और सिद्धान्त नहीं था।” — J KRISHNAMURTI
पता नही कितना कुछ उसके साथ हुआ, प्रशंसा और अपमान, संकट और सुरक्षा, पर वह किसी बात से आहत नही हुआ । ऐसा नही कि वह संवेदनहीन और अबोध था । बल्कि उसके मन मे अपने बारे मे कोई छवि नही थी, कोई निष्कर्ष और सिद्धान्त नहीं था।