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“छुटकू गिलहरी ने देखा कि खेत में रहने वाला इंसान कागज के पुलिंदे में कुछ देख रहा था। छुटकू के मन में कई दिनों से दबी हुई जिज्ञासा उठ खड़ी हुई। वह जानना चाहती थी कि इंसान कागजों में क्या करता है। हर दिन की तरह उस दिन भी वह बहुत समय से कागज़ों में कुछ किए जा रहा था।” — Vandana Yadav
छुटकू गिलहरी ने देखा कि खेत में रहने वाला इंसान कागज के पुलिंदे में कुछ देख रहा था। छुटकू के मन में कई दिनों से दबी हुई जिज्ञासा उठ खड़ी हुई। वह जानना चाहती थी कि इंसान कागजों में क्या करता है। हर दिन की तरह उस दिन भी वह बहुत समय से कागज़ों में कुछ किए जा रहा था।