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“कुछ बिखरी सी पंक्तियाँ है मेरी | कुछ अनकहे जज़्बात है मेरे | कुछ बिखरी सी पंक्तियाँ है मेरी | कुछ अनकहे जज़्बात है मेरे | सोचता हूँ की, संभालु उन्हें या अधूरा ही छोड़ दूँ” — Kuldeep Gera

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कुछ बिखरी सी पंक्तियाँ है मेरी | कुछ अनकहे जज़्बात है मेरे | कुछ बिखरी सी पंक्तियाँ है मेरी | कुछ अनकहे जज़्बात है मेरे | सोचता हूँ की, संभालु उन्हें या अधूरा ही छोड़ दूँ
— Kuldeep Gera