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“ऐसा क्यों है कि अंधेरे में सुबह चार बजे मम्मी के साथ मैं, कुएं के ठंडे पानी से नहाने जाती हूँ। कार्तिक का महीना बहुत ठंड लिए रहता है। ऐसे में सारी तपस्या सिर्फ महिलाएं क्यों कर रही हैं? पापा और पापा की तरह सब पुरूष रजाई में क्यों सो रहे हैं? क्या उन्होंने कोई पाप नहीं किए? जवाब में परंपराओं का हवाला दे दिया जाता था। मुझे फक्र होता है उस शीक्षा पर, सवाल पूछने के अधिकार के उपयोग पर जो हमें सहज उपलब्ध था।” — Vandana Yadav
ऐसा क्यों है कि अंधेरे में सुबह चार बजे मम्मी के साथ मैं, कुएं के ठंडे पानी से नहाने जाती हूँ। कार्तिक का महीना बहुत ठंड लिए रहता है। ऐसे में सारी तपस्या सिर्फ महिलाएं क्यों कर रही हैं? पापा और पापा की तरह सब पुरूष रजाई में क्यों सो रहे हैं? क्या उन्होंने कोई पाप नहीं किए? जवाब में परंपराओं का हवाला दे दिया जाता था। मुझे फक्र होता है उस शीक्षा पर, सवाल पूछने के अधिकार के उपयोग पर जो हमें सहज उपलब्ध था।