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“हे सारथे ! हैं द्रोण क्या, देवेन्द्र भी आकर अड़े, है खेल क्षत्रिय बालकों का व्यूह-भेदन कर लड़े। श्रीराम के हयमेध से अपमान अपना मान के, मख अश्व जब लव और कुश ने जय किया रण ठान के।।” — Maithili Sharan Gupt
हे सारथे ! हैं द्रोण क्या, देवेन्द्र भी आकर अड़े,
है खेल क्षत्रिय बालकों का व्यूह-भेदन कर लड़े।
श्रीराम के हयमेध से अपमान अपना मान के,
मख अश्व जब लव और कुश ने जय किया रण ठान के।।