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“पल्लवी उपन्यास को एक तरफ रख कर बोली, “उपन्यास के काल्पनिक पात्रों का संबंध हमारे समाज के विभिन्न इंसानों से है। एक इंसान को समझने में शायद एक उम्र कम पड़ जाए, परन्तु उपन्यास को चंद घंटे पढ़ने के बाद इनके काल्पनिक पात्रों के माध्यम से आप विभिन्न प्रकार के इंसानों के सभी आयामों से भली-भाँति परिचित हो जाते हैं। अब देखिए न, आप कितना बोल चुके, फिर भी मैं आपको अभी तक समझ नहीं पाई और इससे भी कम शब्दों में उपन्यास का पात्र अपने सभी व्यक्तित्वों से हमें परिचित करा देता है, तो आप ही बताएँ समय किसके साथ बिताना चाहिए। एक ऐसे व्यक्ति के साथ जो ताउम्र एक पहेली बन कर रहे या जिसका चरित्र शीशे जैसा साफ़ हो।” उपन्यास 'एक नदी चार किनारे,” — Rakesh Kumar Srivastava 'Rahi'
पल्लवी उपन्यास को एक तरफ रख कर बोली, “उपन्यास के काल्पनिक पात्रों का संबंध हमारे समाज के विभिन्न इंसानों से है। एक इंसान को समझने में शायद एक उम्र कम पड़ जाए, परन्तु उपन्यास को चंद घंटे पढ़ने के बाद इनके काल्पनिक पात्रों के माध्यम से आप विभिन्न प्रकार के इंसानों के सभी आयामों से भली-भाँति परिचित हो जाते हैं। अब देखिए न, आप कितना बोल चुके, फिर भी मैं आपको अभी तक समझ नहीं पाई और इससे भी कम शब्दों में उपन्यास का पात्र अपने सभी व्यक्तित्वों से हमें परिचित करा देता है, तो आप ही बताएँ समय किसके साथ बिताना चाहिए। एक ऐसे व्यक्ति के साथ जो ताउम्र एक पहेली बन कर रहे या जिसका चरित्र शीशे जैसा साफ़ हो।” उपन्यास 'एक नदी चार किनारे,