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“कभी पानी की तरह, कभी ज़हर की तरह; कभी गुस्से के दो घूँट, कभी जाम के दो बूँद, पी लेंगे. ज़िन्दगी ही तो है.. जी लेंगे!” — Piyush Kaviraj
कभी पानी की तरह, कभी ज़हर की तरह;
कभी गुस्से के दो घूँट, कभी जाम के दो बूँद,
पी लेंगे.
ज़िन्दगी ही तो है.. जी लेंगे!