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“चटर-पटर बोलता हूँ, दिन भर इधर-उधर, कहीं बोलता हूँ सही, तो कहीं पर बस गलत-गलत, लेकिन जो चाहता हूँ वो एहसास, करवा नहीं पाती ये बातें यहाँ, बिन बोले जो बात है, वो बोलने में कहाँ...” — shekhar
चटर-पटर बोलता हूँ, दिन भर इधर-उधर,
कहीं बोलता हूँ सही, तो कहीं पर बस गलत-गलत,
लेकिन जो चाहता हूँ वो एहसास,
करवा नहीं पाती ये बातें यहाँ,
बिन बोले जो बात है, वो बोलने में कहाँ...