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“बचपन की यादें, बचपन की समझ लिए रहती हैं। बादमें उनपर जितने रंग चढ़ाओ मगर वे तो उस रंगरेज को अपनी स्मृति सौंप चुकी होती हैं, जो पक्के रंग चढ़ाने में माहिर है।” — Vandana Yadav
बचपन की यादें, बचपन की समझ लिए रहती हैं। बादमें उनपर जितने रंग चढ़ाओ मगर वे तो उस रंगरेज को अपनी स्मृति सौंप चुकी होती हैं, जो पक्के रंग चढ़ाने में माहिर है।