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“ज़ेहन की शाख़ को इक याद की उंगली ने छुआ और फिर सीने में हर सिम्त कई फूल गिरे तेरी ख़ुशबू में सराबोर हुआ बैठा हूँ” — TRIPURARI
ज़ेहन की शाख़ को इक याद की उंगली ने छुआ
और फिर सीने में हर सिम्त कई फूल गिरे
तेरी ख़ुशबू में सराबोर हुआ बैठा हूँ