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“हर क़तरा जो बहा आँखों से मेरे लिए अनमोल था हर हर्फ़ जो डूबा स्याही में वो तेरा ही बोल था इन कतरों में इन हर्फों में मेरी तो दुनिया समायी है जाने क्यों हर बार मग़र तुम पर ही ये दौलत लुटाई है... !” — Neelam Jain
हर क़तरा जो बहा आँखों से
मेरे लिए अनमोल था
हर हर्फ़ जो डूबा स्याही में
वो तेरा ही बोल था
इन कतरों में इन हर्फों में
मेरी तो दुनिया समायी है
जाने क्यों हर बार मग़र
तुम पर ही ये दौलत लुटाई है... !