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Quote by Anu mehta

“तु और तेरी दोस्ती मेरी नज़र में मेरी दोस्त बहुत 'माईने' रखती है, जो हर वक़्त मेरे साथ होने का एहसास दिलाती है । लोग कहते है ज़िन्दगी हमें बहुत खूबसूरत दोस्त देती है । लेकिन पर मैं कहती हूँ, अच्छे दोस्त हमें खूबसूरत ज़िन्दगी देते है । किसी ने सच ही कहा है :- मिलना बिछड़ना सब किस्मत का खेल है. कभी नफ़रत तो कभी एक दुसरे का मेल है. दुनिया में बिक जाते है हर रिश्ते, सिर्फ दोस्ती ही यहाँ नॉट फॉर सेल होती है. आइए अपने शब्दों अपने दोस्त के लिए कुछ कहना चाहती हूँ अगर आपकी भी कोई ऐसा दोस्त हो जिस के बिना आपको आपकी ज़िन्दगी आपकी दोस्त के बिना बेरंग लगती है उनको ये कविता भेज सकते है………. एहसान नहीं एहसास है तेरी दोस्ती, ज़िन्दगी का भार नहीं, खूबसूरत एहसास है तेरी दोस्ती जिंदगी की मुश्किल नहीं, मुश्किलों का हल है तेरी दोस्ती, मेरे सपनो की उड़ान और प्यारी सी मुस्कान है तेरी दोस्ती, जान देना कोई बड़ी बात नहीं, उम्र भर साथ देना है तेरी दोस्ती, गुलाब के फूल और उसकी महकती हुए खुशबू का राज है तेरी दोस्ती, Negi तुम नहीं जानती तुम और तेरी दोस्ती दोनों कितनी प्यारी है… उन दिनों की बात है जब वो Interview देने Aishwarya Group आई थी, तब First Introduction हुआ था तो उसकी मासूमियत उसके चेहरे पे झलक रही थी । उसका धीरे -2 से बोलना बहुत प्यारा सा लगा दिल को छू रहा था । Interview के कुछ दिनों के बाद 29/11/2017 को Aishwarya Health Care में New joining थी । सारे Employee की तरह Negi का Introduction सब (General Manager, HOD All Employee) से करवाया…… मुझे नहीं पता वो मेरे बारे में क्या सोचती थी मेरे प्रति उसके क्या विचार थी । मेरी ओर से दिन- प्रतिदिन थोड़ी -2 Attachment उसके लिए बढ़ रही थी । मुझे उसकी बातें और हरकतें मुझे बहुत अच्छी लगती थी । एक तो वो कुछ बोलती नहीं थी और जब भी बोलती थी बहुत तेजी से बोलती, कभी -2 वो मेरा नाम ले लेती थी जब मेरा नाम लेती मुझे बहुत अच्छा लगता है पर मैंने उसको कभी एहसास नहीं होने दिया जब वो मेरा नाम लेती है तो मुझे कितना अच्छा लगता है एक अपनापन सा feel होता है कुछ लोग उसके बारे में बहुत गलत बोलते थे पर मैंने उन लोगो की बातों को Ignore कर देती थी । (कुछ दिनो के बाद) वक्त के साथ-साथ हमारा ये रिश्ता और मजबूत बनता गया और अजनबी से बहुत अच्छे दोस्त बन गए । Office से Rental House और Rental House से Office एक साथ आना - जाना शुरू हो गया । उसका Rental House मेरे Rental House से 2 km की दुरी पे था । हम दोनों का एक बस में आना जाना रहता था, हम दोनों एक साथ एक ही Prem बस में Office आते थे और एक साथ एक ही Rental House Friends बस में जाते थे । हम दोनों का सफर बहुत अच्छा था, बहुत अच्छा था वो बीता कल । Negi का पूरा नाम Hemlata है । मैं उसको प्यार से Negi बोलती हूँ, मेरी पहाड़ों की रानी, Negi उत्तराखंड की रहने वाली है, वो बहुत अच्छी लड़की है बस उसकी एक ही कमी है, वो बहुत कम बोलती है सारे उसका मजाक उड़ाते रहते थे जो मुझे पसंद नहीं आता । मानती हूँ कम बोलना सबसे अच्छी बात मानी जाती है और यह एक सच्चे और सभ्य इंसान की पहचान भी होती है। इस दुनिया मे कई तरह के लोग हैं जिनके सोचने का तरीका अलग अलग है। कुछ लोग कम बोलने वाले को पसन्द करते हैं तो कुछ लोग अधिक बोलने वाले को । अधिक बोलने वाले का तो कुछ भी नुकसान नही होता लेकिन कम बोलने वाले कभी कभी मुसीबत में पड़ जाते हैं । Negi के साथ भी कुछ ऐसा हो रहा था धीरे -2 समय बढ़ता गया । कुछ लोग Negi की ज्यादा खिल्ली उड़ाते हैं और ये खिल्ली उड़ाने वाले लोग वे ही होते हैं जो खुद किसी काम के नही होते । Negi ना ही अपने हक ले लिए किसी से लड़ नही पाती थी । जिसके वजह से कभी कभी वह खुद का हक भी गवां बैठती है। इसलिए हर रोज उसको समझना ये जरूरी था कि हर जगह कम न बोला जाए । जहां इसकी जैसी जरूरत है वैसा ही करने में भलाई है। अक्सर देखा गया है Negi की कम बोलने की आदत लोगो को ज्यादा बिगाड़ा दिया था जिसके चलते दूसरे लोग उसको सुना देते है लेकिन वो जवाब नही दे पाती। कोई भी कभी भी कुछ भी कह देता है क्योंकि लोग ये जान चुके थे कि Negi जवाब में कुछ नही कह पायेगी । इसलिए यह जरूरी है कि Negi इतना भी कम नही बोलो की सामने वाला कुछ भी कह के निकल जाए । कम बोलना बहुत ही अच्छी बात है लेकिन Negi कम बोलने की वजह से खुद ही परेशान हो जाती थी । सब से अच्छी बात ये है जरूरत के अनुसार Negi ने खुद को Change कर लिया । कब कहां कितना बोलना सब सीख गई है अब हमारी Negi बड़ी हो गई है अब वो कभी कभी मुझे भी समझती है जब मै परेशान हो जाती हूँ ।”

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Anu mehta

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“I will never forget their faces, their incomprehension and tears. Amid all the wrongness of that moment, I knew something was required of me. To hide my fear and offer them a glimpse of a future none of us knew had any certainty. I have no memory of this but my mother told me years later that I looked into her face and said, 'I'm not going to die, I'm going to write a book.' To commit to writing, or art, is to commit to living. A self imposed deadline as a means of continued existence. It has taken me a long time to write that book and here I am, so very far from that awful night”