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“स्वार्थ ही यदि होगा आधार, होंगे बहुविवाह व व्यभिचार, कैकेयी का होगा उद्भव, षड़यंत्र तब लेंगे आकार, विमाता से ममता का, उतरेगा यदि आवरण, राम को वनवास तथा, दशरथ का होगा मरण।” — Pradyumna Kumar Tiwari
स्वार्थ ही यदि होगा आधार,
होंगे बहुविवाह व व्यभिचार,
कैकेयी का होगा उद्भव,
षड़यंत्र तब लेंगे आकार,
विमाता से ममता का, उतरेगा यदि आवरण,
राम को वनवास तथा, दशरथ का होगा मरण।