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“त्रिलोकपति महादेव के ध्यान मात्र से पवित्र हो उठे अंतरमन, सच भाग्यशाली है नाग वासुकी जो विराजमान है उनकी ग्रीवा पर, भाग्यवान है चंद्र जो सुशोभित है उनके मस्तक पर, परंतु इनसे भी अधिक खुशकिस्मत है गंगा जो बहती है उनके घने केशों से” — Deeksha Tripathi
त्रिलोकपति महादेव के ध्यान मात्र से पवित्र हो उठे अंतरमन,
सच भाग्यशाली है नाग वासुकी जो विराजमान है उनकी ग्रीवा पर,
भाग्यवान है चंद्र जो सुशोभित है उनके मस्तक पर,
परंतु इनसे भी अधिक खुशकिस्मत है गंगा जो बहती है उनके घने केशों से