Quotessence
Home / Quotes / Quote / Image

Quote image editor Vishnu Sakharam Khandekar

Back to previous page

“स्त्री के शरीर और पुरुष के शरीर में स्त्री और पुरुष के मन में, स्त्री और पुरुष के जीवन में, कितना अन्तर होता है! पुरुष अमूर्त के पीछे सहज दौड़ता है। इसीलिए उसे कीर्ति, आत्मा, पराक्रम, परमेश्वर आदि बातों में तुरन्त आकर्षण लगने लगता है! किन्तु स्त्री इन बातों पर आसानी से मोहित नहीं होती। उसे प्रीति, पति, संतान, सेवा, घर, गृहस्थी आदि मूर्त बातों का अधिक आकर्षण होता है। वह संयम बरतती है त्याग भी करती है किन्तु वह सब मूर्त बातों के लिए! उसे अमूर्त के प्रति उतना लगाव नहीं होता जितना पुरुष को। अपना सर्वस्व देकर पूजने के लिए अपने आँसुओं का अभिषेक करने के लिए स्त्री को एक मूर्ति की आवश्यकता हुआ करती है। पुरुष स्वभावतः आकाश का पुजारी है! स्त्री को धरती की पूजा अधिक प्यारी है!” — Vishnu Sakharam Khandekar

Quote 1080 x 1350 Instagram portrait
More
Platforms
Pure ratios
स्त्री के शरीर और पुरुष के शरीर में स्त्री और पुरुष के मन में, स्त्री और पुरुष के जीवन में, कितना अन्तर होता है! पुरुष अमूर्त के पीछे सहज दौड़ता है। इसीलिए उसे कीर्ति, आत्मा, पराक्रम, परमेश्वर आदि बातों में तुरन्त आकर्षण लगने लगता है! किन्तु स्त्री इन बातों पर आसानी से मोहित नहीं होती। उसे प्रीति, पति, संतान, सेवा, घर, गृहस्थी आदि मूर्त बातों का अधिक आकर्षण होता है। वह संयम बरतती है त्याग भी करती है किन्तु वह सब मूर्त बातों के लिए! उसे अमूर्त के प्रति उतना लगाव नहीं होता जितना पुरुष को। अपना सर्वस्व देकर पूजने के लिए अपने आँसुओं का अभिषेक करने के लिए स्त्री को एक मूर्ति की आवश्यकता हुआ करती है। पुरुष स्वभावतः आकाश का पुजारी है! स्त्री को धरती की पूजा अधिक प्यारी है!
— Vishnu Sakharam Khandekar