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“फौजियों के नाम और उनकी गौरव-गाथाएं उनकी युनिट में अक्सर दोहराई जाती हैं। कभी-कभी देश भी शायद उन्हें याद कर लेता होगा पर शहीद की पत्नी का कर्ज़ ये देश कैसे चुकाएगा? देश के लिए जान देने वाले सिपाहियों के बच्चों का जवाबदेह कौन है जो बिना बाप की छत्रछाया के बड़े होते हैं।' कुसुम अपनी ही धुन में बोले जा रही थी।” — Vandana Yadav
फौजियों के नाम और उनकी गौरव-गाथाएं उनकी युनिट में अक्सर दोहराई जाती हैं। कभी-कभी देश भी शायद उन्हें याद कर लेता होगा पर शहीद की पत्नी का कर्ज़ ये देश कैसे चुकाएगा? देश के लिए जान देने वाले सिपाहियों के बच्चों का जवाबदेह कौन है जो बिना बाप की छत्रछाया के बड़े होते हैं।' कुसुम अपनी ही धुन में बोले जा रही थी।