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“खिड़कियों में कुछ तो खास होता है। चाहे आप अपनी खिड़की से बाहर देखें या बाहर से किसी खिड़की को देखें (झांकें नहीं)। चाहे वो ट्रेन की खिड़की हो या फिर किसी वीरान पड़े घर की खिड़की।” — Tarang Sinha
खिड़कियों में कुछ तो खास होता है। चाहे आप अपनी खिड़की से बाहर देखें या बाहर से किसी खिड़की को देखें (झांकें नहीं)। चाहे वो ट्रेन की खिड़की हो या फिर किसी वीरान पड़े घर की खिड़की।