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“संप्रभुता का मूल्य चुकाकर प्राप्त किया गया वैभव, निर्धनता से भी अधिक कलंकित होता है।” — Pradyumna Kumar Tiwari
संप्रभुता का मूल्य चुकाकर प्राप्त किया गया वैभव, निर्धनता से भी अधिक कलंकित होता है।
“संप्रभुता का मूल्य चुकाकर प्राप्त किया गया वैभव, निर्धनता से भी अधिक कलंकित होता है।” — Pradyumna Kumar Tiwari