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Manav Kaul Quotes

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Famous Manav Kaul Quotes

“पर मैं बार-बार उस बात पर वापस आता हूं कि मैं क्या हूं ? और इस दुनिया में मेरी भागीदारी क्या है ? सारे जवाब लगातार बदलते रहते हैं और लगातार एक असहायता घर करती जाती है । यह लड़ाई भीतर कभी ख़त्म नही होती कि हमारी भागीदारी का क्या मतलब है ? और वह कहां तक है ? इन सवालों के प्रति ईमानदारी बनाए रखने में हमारी सारी भागीदारी भी, समस्या की परिधि पर अपना दम तोड़ चुकी होती है ।”

“वह बारिश के ही दिन थे जब मां नहीं रही थी । तब पूरा घर काटने को दौड़ता रहता था । मैं और मेरे पिता के बीच से मानो सारा सामान्य किसी ने उधेड़ दिया था । हम दोनों उधड़े स्वेटर से पूरे घर में बिखरे पड़े रहते । मैं उनके लिए क्या करूं और वो मेरे लिए क्या करें में हम दोनों एक-दूसरे को ताकते रहते ।”