“आज मैं आपको एक बात याद दिला दूँ की पशु-समान व्यवहार और कृत्यों से क्षणिक सुख तो किसी को भी प्राप्त हो सकता है, परंतु अनंत की अनुभूति, आंतरिक शांति और शाश्वत आनंद की प्राप्ति केवल उसी को हो सकती है जिसने न केवल अपने हर क्षण को प्रार्थनापूर्ण क्षण में बदल दिया है बल्कि जो शुभ एवं यथार्थवादी विचारों के साथ आत्मोन्नति के लिए भी निरंतर प्रयत्नशील रहता है। प्रार्थनापूर्ण होना हर चीज और हर जगह में विद्यमान ईश्वर के साथ गहरा संबंध स्थापित करना है। पतंजलि कहते हैं कि प्रार्थना एक कृत्य नहीं, अपितु एक स्वभाव, गुण और आंतरिक प्रवृत्ति है। प्रभु आप को प्रार्थनाशील बनने तथा अपने हर क्षण को प्रार्थनापूर्ण क्षण में बदलने में सहायता करें, कृपा करें। मंगल शुभकामनाएं। श्री राम दूताय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।”
Quote by Rajesh Goyal, राजेश गोयल
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Source: Mind-Bending Riddles Inspired by Philosophy | With Answers and Explanations | Philosophical Riddles | Philosophy in Rhymes : From Plato, Socrates, Lao Tzu, the Stoics, Epicurus, Buddhism, Rumi
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