“जब माता या पिता में से कोई एक बालक के निर्माण में अनुपस्थित हो जाता है, तब उसके भीतर का संतुलन टूट जाता है। वही संतुलन जो अर्धनारीश्वर का तत्व है। जब यह तत्व अनुपस्थित होता है, तब पुरुष केवल एक शक्तिशाली यंत्र बन जाता है और स्त्री मात्र एक सजीली वस्तु।” Human NatureIdentity CrisisPsychological DevelopmentPhilosophical ReflectionsInner HarmonyAbsent ParentArdhanarishvaraMasculinity And FemininityEmotional ImbalanceGender Duality Book:त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह Source: त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह