“सबसे महत्वपूर्ण सत्य यह है कि स्त्री स्वयंवर में जीती जाने वाली कोई ‘वस्तु’ नहीं है। प्रतियोगिताएँ तो मात्र आधार हैं। यदि राजकुमारी ने पहले ही अपने मन में किसी का वरण कर लिया है, तो भी हमें उनकी इच्छा का सम्मान करना चाहिए। विवाह एक व्यक्तिगत निर्णय है, न कि किसी कौशल अथवा शक्ति-प्रदर्शन का पुरस्कार!” FeminismWomen EmpowermentGender EqualitySocial ReformIndividual ChoiceDignity Of WomenConsent In MarriageEthics And SocietyIndian TraditionsSwayamvara Book:त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह Source: त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह