“ऐसे वक्त ही इवा कार्णिक की आस्था झूठ बोलने में और पुख्ता हो जाती और उसकी यह मान्यता एक बार फिर सही साबित होती कि झूठ और सच केवल बातें होती हैं और ये कि बोलने वाले की काबिलियत और सुनने वाले की परख किसी बात को सच या झूठ का जामा पहनाते हैं। (कहानी: 'ऐसा ही कुछ भी')” TruthLies Book:Jinki Mutthiyon Mein Surakh Tha Source: Jinki Mutthiyon Mein Surakh Tha