Quotessence
Home / Books / Yayati: A Classic Tale of Lust

Yayati: A Classic Tale of Lust

Book by Vishnu Sakharam Khandekar · 1 quotes · Hindi, Sharmishtha, Kach

Filter quotes by topic

Yayati: A Classic Tale of Lust Quotes

“इसी वनवास में मैं यह भी जान पाई कि ॠषि-मुनि वन में जाकर तपस्या क्यों किया करते है। निसर्ग और मानव का नाता अनादि अनंत है। ये दोनाें मानो जुड़वाँ भाई हैं। इसीलिए निसर्ग के सान्निध्य में जीवन अपनी सारी सच्चाइयाँ लेकर हमारे सामने प्रकट हो जाता है। मानव यह समझने लगता है कि जीवन की असली शक्ति क्या है और उसकी सही-सही मर्यादाएं क्या हैं। मानव निसर्ग से दूर हो जाता है तो उसका जीवन एकांगी होने लगता है। उस कृत्रिम और एकांगी जीवन में उसकी कल्पनाएं, भावनाएं, वासनाएं सब अवास्तविक और विकृत बन जाती हैं। वो तो मेरा सौभाग्य था जो अभागिन होते हुए भी मैं यहाँ आई और जीवन की जड़ में जो सत्य हुआ करता है उसका दर्शन कर सकी।”