“ज़ख़्मों पर मरहम लग चुका था, फिर भी दर्द होता रहा। तुम्हारी याद आती रही, मौसम सर्द होता रहा॥”
Quote by Rehan Katrawale
Author
You May Also Like
“कसूर दिन का था, इल्ज़ाम रात पर आया है। गैरों से क्या शिकायत करना, दिल जब अपनों ने दुखाया है॥”
“आज बरसात नहीं हुई, तुमसे बात नहीं हुई। तुम तो गहरी नींद में सो गए, हमारे यहाँ रात नहीं हुई॥”
“नाकाम ही सही पर कोशिश तो करी थी हमने, झूठी ही सही पर मोहब्बत तो करी थी उन्होने॥”
“Priorities change and so does people”
Source: Beintehaa: Daastan-E-Mohabbat