“माँ तो माँ है.. ** दूर हो तुम.. जो घर से अपने.. तो सोचते होगे.. ऑफिस में बैठे.. माँ कैसी होगी? माँ कैसी होगी? घर पे है, तो ठीक ही होगी। काम में डूबे, तुम सोचते होगे.. माँ जागती होगी.. या सोती होगी। माँ तो माँ है.. जाग ही रही है.. सोई नहीं.. शायद रोती होगी। सोचती होगी तुम आओगे.. ढूंढती होगी कौनसी राह से.. तुम दूर हो ना.. समझोगे कैसे। डरती है वो.. खाली घर के कोने से.. झूले के खाली होने से.. मौसम के बदलने से.. तुम्हारे घर से चलने से। पूछती है फिर कब आओगे.. बता देना.. साँसें थोड़ी हैं.. हक अपना जता देना। इक बार तो दिन में बात किया कर.. नींद अच्छी आती है.. तेरी आवाज़ सुनकर.. तेरी हंसी, तेरी खुशी के वास्ते.. कर दे सब कुर्बान वो तुझपे। दुआएं देती होगी.. माँ तो माँ है.. रोती होगी.. फिर चुपचाप सोती होगी।” VikrmnMothers DayHindiGuru With GuitarMaaMaa To Maa HaiPoem Dedicated To MothersPoem For Mothersम Book:Guru with Guitar Source: Guru with Guitar