“प्रेम यदि निस्वार्थ हो, सीता तभी संग होगी, पूर्ण निष्ठा समर्पण से ही, ये धनु भंग होगी। संभवतः यह पवित्र प्रेम की उसी शक्ति की पराकाष्ठा थी, जिसने श्रीराम को पाँच दिवस में महासागर पर सेतु बांधने का सामर्थ्य दिया था अथवा आज फिर वही संकल्प-शक्ति प्रकट हो गयी थी, जिसने युगों पहले रघुवंशियों को अजेय बना दिया था।” DharmaRamaSelfless LoveSpiritual LoveRamayanaDivine UnionSitaBow BreakingDevotion And SurrenderEpic Symbolism Book:त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह Source: त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह