“चटर-पटर बोलता हूँ, दिन भर इधर-उधर, कहीं बोलता हूँ सही, तो कहीं पर बस गलत-गलत, लेकिन जो चाहता हूँ वो एहसास, करवा नहीं पाती ये बातें यहाँ, बिन बोले जो बात है, वो बोलने में कहाँ...” PoemSpeakingPoems On LifeShekhar Author:shekhar