“और इतना सब करते हुए भी जानना कि इश्क पर तुम्हारे आत्मदाह का कोई असर न होगा. वो चिरकाल तक इतना ही क्रूर रहेगा कि उसकी हुकूमत में किसी को इन्किलाबी झंडा उठाने का हक नहीं है. वो जब चाहे किसी को भी देश निकाला दे सकता है और उस देश से कहीं दूर बाहर जाने के बावजूद तुम्हारे खून के हर कतरे पर उसकी हुकूमत रहेगी. वो जब चाहेगा तुम्हें खून के आंसू रुलाएगा. जिस्म के पैरहन में कुछ भी मौजूद न होगा. तुम खाली हो जाओगे. अन्दर से रीत जाओगे. तब उस एक आत्मदाह से लोगों को आत्मबल मिलेगा और वो काला झंडा लिए निकल पड़ेंगे... जलना क्या...जीना क्या...मिटना क्या...इश्क क्या... इन्कलाब! इन्कलाब! इन्कलाब!” RomanceHindi Short StoryIshq Book:Teen Roz Ishq Source: Teen Roz Ishq