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Quote by Omprakash Valmiki

Work

Joothan: An Untouchable's Life

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Author

Omprakash Valmiki

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“নাপিত বনাম নমঃশুদ্র নাপিত উপরে নাকি নমঃশুদ্র সম্প্রদায় উপরে — এ কথা যখন আলোচ্য হল তখন কেবলমাত্র এই বললাম সাহিত্য দিয়েও নয়, গোপাল ভাঁড়ের গল্প দিয়ে নয়, রাজনীতি দিয়ে ভাবো । কতজন মন্ত্রী হয়েছে এ নমঃশুদ্র সম্প্রদায়ে — তাই দিয়ে ভাবো । নাপিতদের কেউ মন্ত্রী হতে পারেনি তো আর বহু নমঃশুদ্র মন্ত্রী হয়েছে তো এ যাবৎ গুনে গুনে দ্যাখো । এই রাজনীতি দিয়ে বোঝা যায় নমঃশুদ্র সম্প্রদায় নাপিতের উপরেই ঠিক ।”

“भारतीय समाज में ‘जाति’ एक महत्त्वपूर्ण घटक है। ‘जाति’ पैदा होते ही व्यक्ति की नियति तय कर देती है। पैदा होना व्यक्ति के अधिकार में नहीं होता। यदि होता तो मैं भंगी के घर पैदा क्यों होता? जो स्वयं को इस देश की महान सांस्कृतिक धरोहर के तथाकथित अलमबरदार कहते हैं, क्या वे अपनी मर्जी से उन घरों में पैदा हुए हैं? हाँ, इसे जस्टीफाई करने के लिए अनेक धर्मशास्त्रों का सहारा वे जरूर लेते हैं। वे धर्मशास्त्र जो समता, स्वतंत्रता की हिमायत नहीं करते, बल्कि सामन्ती प्रवृत्तियों को स्थापित करते हैं।”

“तरह–तरह के मिथक रचे गए—वीरता के, आदर्शों के। कुल मिलाकर क्या परिणाम निकले? पराजित, निराशा, निर्धनता, अज्ञानता, संकीर्णता, कूपमंडूकता, धार्मिक जड़ता, पुरोहितवाद के चंगुल में फँसा, कर्मकांड में उलझा समाज, जो टुकड़ों में बँटकर कभी यूनानियों से हारा, कभी शकों से। कभी हूणों से, कभी अफगानों से, कभी मुगलों, फ्रांसीसियों और अंग्रेजों से हारा, फिर भी अपनी वीरता और महानता के नाम पर कमजोर और असहायों को पीटते रहे। घर जलाते रहे। औरतों को अपमानित कर उनकी इज्जत से खेलते रहे। आत्मश्लाघा में डूबकर सच्चाई से मुँह मोड़ लेना, इतिहास से सबक न लेना, आखिर किस राष्ट्र के निर्माण की कल्पना है?”