“सिखा न सकी ,जो उम्र भर तमाम किताबें मुझे , करीब से कुछ चेहरे पढ़े और न जाने कितने सबक सीख लिए।”
Quote by Surendra Sidar
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“मरे हुए की कितनी भी कसम खाओ, कोई फर्क नहीं”
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“Kisi ne Dhul kya jhonki Aankhon me, Kambakhat Pahle se Behtar dikhne Lga....”
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“ये दिन पिछले दिन की तरह पुरानी तमाम बातें समेटने में निकल गया।”
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