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Hindi Quotes Quotes

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Hindi Quotes Quotes

“Top Quotes from ‘Love Ends Peacefully' Chapter 1: इनोसेंस से इश्क़ तक "जिसे बचपन में माँ की ममता न मिले, वो पूरी उम्र उसे तलाशता रहता है — कभी रिश्तों में, कभी मोहब्बत में।" "ज़िंदगी जब सवाल बन जाए, तो जवाब अक्सर किसी मुस्कान में छिपा होता है।" "पहली बार किसी की आँखों में देखा था — और खुद को खो देने का मन किया था।”

“अंतिम प्रस्थान खुद की चिता को अब स्वयं आग करते हैं, चलो इस अंतहीन पीड़ा का अब बहिष्कार करते हैं। मीरा के उस प्रेम का अब राग करते हैं, वैराग्य की राह का अब बस जाप करते हैं। चलो इस बार भी हम सबको माफ़ करते हैं, विरह के आलाप से खुद को ही साफ़ करते हैं। चलो अब प्रेम का ही प्रकाश करते हैं, प्रेम त्याग कर अब खुद का ही त्याग करते हैं। अपनी अंतहीन पीड़ा का संहार करते हैं, बैसाखी से अब सागर पार करते हैं। चिता की अग्नि से अब आखिरी श्रृंगार करते हैं, चलो हम भी अब खुद को माफ़ करते हैं।”

“हमें हमेशा अपनी और दूसरों की गलतियों से सबक लेते हुऐ बस आगें बढ़ते रहना चाहिए, और मेरे हिसाब से, जो आदमी अपनी गलतियों से सीख लेते हैं शायद ही वो कभी आगें पछतातें हो।”

“नमस्कार। क्या आपने सोचा है कि हमारी असली मंजिल क्या है और वो कितनी दूर है? वो है - अपने ऋण-अनुबंध, कौल-करार पूरे करते हुए, कर्तव्यों का पालन करते हुए - बोध प्राप्त करना, परमात्मा को अपने भीतर महसूस करना और पूर्णता को प्राप्त करना। और पहला कदम है – खुद को पहला कदम उठाने के लिये राजी करना। मंज़िल कोई भी क्यों न हो बस एक कदम की दूरी पर ही है। कुदरती कानून है की जैसे जैसे हम पाखण्ड और क्षुद्रता को छोड़ते जाते हैं तथा अपने चिन्तन, चरित्र और प्रयासों को ऊँचा उठाते चले जाते हैं, वैसे वैसे मंज़िल पास आती चली जाती है। इसीलिये हर कदम सूझ-बूझ कर सही दिशा में उठाना और हर पल होश से जीना प्रार्थना है। प्रभु से प्रार्थना है कि आपको उनका अनुग्रह और उनके अनुग्रह से मंज़िल जल्द ही प्राप्त हो जाये। मंगल शुभकामनाएं। श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।”

“तुम्हारा अच्छा होना, मुझे बुरा नहीं बनाता। तुम्हारा समझदार होना, मुझे मूर्ख नहीं बनाता।”

“स्कूल वाला प्यार सबकी जिंदगी का पहला पहला प्यार होता, सब कुछ क्या क्या फील करवाता है। स्कूल वाले प्यार में एक अनोखी पवित्रता होती है जो अंतिम सांस तक दिल की धड़कनों को जिंदा रखती है ।”

“राम राम मित्रों, आज मैं सतयुग और कलयुग के बीच के अंतर को देख रहा था। मैंने ये पाया कि यह अंतर केवल युगों (समय) का नहीं, बल्कि हमारी सोच, वचन, कर्म, स्वधर्म का ज्ञान और पालन तथा सबसे महत्वपूर्ण – बोध का अंतर है। मुझे लगता है कि उदर-भरण और परिवार का पालन-पोषण तो जीवन का लक्ष्य हमेशा से ही रहा है। तलब के तकाजे भी हर समय पर थे। मोक्ष, मान-सम्मान, धन – ये सभी इच्छाएं सदैव से मनुष्यों के मन में रही ही हैं। लेकिन सतयुग और कलयुग में इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के तरीकों में भिन्नता है। सतयुग में, शुभकर्म, मेहनत, वचन पालन और स्वधर्म पर बल दिया जाता था, जबकि कलयुग में क्षुद्रता, नीचता और अधर्म भी अपना रास्ता बना लेती है। इसीलिए मेरा मानना है कि इस बोध से पहले का समय कलयुग है और इस बोध के बाद का समय सतयुग है। बस यही बोध प्राप्त करने का सतत प्रयास हमारी प्रार्थना है। प्रभु से प्रार्थना है कि उनकी कृपा से न केवल आपको जल्द ही बोध प्राप्त हो जाये, बल्कि आपके आस पास का ऊर्जाक्षेत्र और बोद्धक्षेत्र भी लगातार बड़ा होता जाए जिससे न केवल आप अपने जीवन में खुशी और समृद्धि प्राप्त कर पायें, बल्कि अपने परिवार और समाज के लिए भी वरदान बन जायें। श्री रामाय नमः। ॐ हं हनुमते नमः।”

“चाहे किसी को पता हो या न हो, इश्वरीय शक्ति ही इस ब्रह्मांड में हर जन एवं हर कण की पालक है। ईश्वर के विराट, अनंत, असीम व निराकार स्वरुप को समझ कर, अपने भीतर उस ईश्वरत्व का अनुभव करना ही #प्रार्थना का प्रथम उद्देश्य है। जब हम अपनी अनुभव हीनता तथा अहंकार के पर्दों को हटाकर अपने आराध्य के चरणों मे निर्मल ह्रदय से अप्रतिहत प्रार्थना करते हैं तो वह व्यापक, अनंत एवं शाश्वत स्वरुप हर जगह और हर किसी मे स्वयं ही दिखने लगता है। हमारा जीवन परिवर्तित होने लगता है, दिव्य होने लगता है, जहाँ प्रतिकार करने के लिए कुछ भी नहीं रहता है। ईश्वर की कृपा का सुंदर उजियारा फैलता जाता है औऱ जिसके प्रकाश में हर प्रकार की चिंता, कुंठा, निराशा, हताशा का अंधेरा अपने आप छंटने लगता है। ईश्वर से प्रार्थना है कि आपके और आपके अपनो के जीवन मे सत्यता, सुंदरता, प्रेम, उत्सव, सकारात्मकता, प्रचुरता, विपुलता, शुभता और खुशियों में तेजी से वृद्धि हो। ईश्वर आपके सभी शुभ प्रयत्नों और कार्यों को सफल करें। मंगल शुभकामनाएं।”

“कुछ बिखरी सी पंक्तियाँ है मेरी | कुछ अनकहे जज़्बात है मेरे | कुछ बिखरी सी पंक्तियाँ है मेरी | कुछ अनकहे जज़्बात है मेरे | सोचता हूँ की, संभालु उन्हें या अधूरा ही छोड़ दूँ”