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Quote by Divya Prakash Dubey

“पापा शुरू से टॉपर रहे थे। इसलिए कभी समझ नहीं पाए थे कि टॉपर के अलावा बाकी लोग दुनिया में ज़िंदा कैसे रहते हैं। उनकी नौकरी कहाँ लगती है, वो खाते कैसे हैं और अपना घर कैसे चलाते हैं।”

Quote by Divya Prakash Dubey

Work

मसाला चाय

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Author

Divya Prakash Dubey

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“कभी भी ये देखना हो कि सरकारी अधिकारी अच्छा है या खराब तो बस उठा के ये देख लो कि उसकी पिछली कुछ postings कहाँ-कहाँ हुई हैं। अगर पिछले 5-10 साल में उसकी posting केवल अच्छी जगहों पर हुई है तो वो अधिकारी, अच्छा अधिकारी कम अच्छा मैनेजर ज़्यादा होता है। और अगर पोस्टिंग खराब जगहों पर हुई है तो वो अधिकारी अच्छा अधिकारी होता है, जो अपनी posting manage नहीं कर पाता।”

“और इतना सब करते हुए भी जानना कि इश्क पर तुम्हारे आत्मदाह का कोई असर न होगा. वो चिरकाल तक इतना ही क्रूर रहेगा कि उसकी हुकूमत में किसी को इन्किलाबी झंडा उठाने का हक नहीं है. वो जब चाहे किसी को भी देश निकाला दे सकता है और उस देश से कहीं दूर बाहर जाने के बावजूद तुम्हारे खून के हर कतरे पर उसकी हुकूमत रहेगी. वो जब चाहेगा तुम्हें खून के आंसू रुलाएगा. जिस्म के पैरहन में कुछ भी मौजूद न होगा. तुम खाली हो जाओगे. अन्दर से रीत जाओगे. तब उस एक आत्मदाह से लोगों को आत्मबल मिलेगा और वो काला झंडा लिए निकल पड़ेंगे... जलना क्या...जीना क्या...मिटना क्या...इश्क क्या... इन्कलाब! इन्कलाब! इन्कलाब!”

“ऐ सुनो न, महादुष्ट और चोट्टेकुमार, मुझे एक चिट्ठी लिखो न! हे आलसावतार, तुमसे कोढ़ी भी लजा जाए. हमरा एतना चिट्ठी पढ़े हो बैठ के जाड़ा में, चूल्हा में पकाया अल्लू खाते हुए. भुक्खड़ रे, ई सब से ऊपर उठ के एक ठो हमको चिट्ठी लिखो न. ऐसे कईसे चलेगा, खाली कोहरा पी के जिए आदमी, बतलाओ, ठंढा का दिन आया, हाथ गोड़ अकड़ रहा है. ए गो तुमरा चिट्ठी आता तो हम भी न बैठ के अलाव तापते हुए पढ़ते. बचवन सब को बतलाते ई हमार चोट्टा दोस्त है. तुम लोग अगर बेसी सुधरे हुए निकल गए कहीं गलती से तो तुम सबको इसी के पास भेज देंगे, चोट्टागिरी का ट्यूशन लगाने.”