“और सबसे अच्छी बात कि किस तरह हर कोई अपने जीवन में पीछे मुड़ कर देखने पर, ख़ुद पर घटने वाली हरेक अच्छी-बुरी घटना की कड़ियाँ एक अर्थपूर्ण ढंग से जोड़ पाता है. अपने होने की प्रक्रिया में कैसे हर कोई, थोड़ा-थोड़ा ही सही, संवरता जाता है.” LifeLiving Book:Ek Anuja Source: Ek Anuja
“एक तरह से देखा जाए तो - हर परिस्थिति, हर खेल में हमेशा केवल दो ही तो खिलाड़ी होते हैं | एक हम ख़ुद और एक निष्ठुरता. जब भी हम खुद को हारा हुआ पाते हैं, शायद कोई निष्ठुरता ही तो जीतती है हमेशा. हालातों की निष्ठुरता. ज़माने की निष्ठुरता. क़िस्मत की निष्ठुरता. संबंधो की निष्ठुरता. ख़ुद अपनी अपने से कभी निष्ठुरता.” LifeLiving Book:Ek Anuja Source: Ek Anuja