“हर क़तरा जो बहा आँखों से मेरे लिए अनमोल था हर हर्फ़ जो डूबा स्याही में वो तेरा ही बोल था इन कतरों में इन हर्फों में मेरी तो दुनिया समायी है जाने क्यों हर बार मग़र तुम पर ही ये दौलत लुटाई है... !” Devotion Book:Ek Anuja Source: Ek Anuja