“Khalo KItabat :- ख़तो किताबत की जरूरत क्यों तुम्हें महसूस होगी तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी ख़तो किताबत की जरूरत क्यों तुम्हें महसूस होगी केसा होगा तेरा, घर वो जहाँ में नहीं हूँ यह सोच कर ही खुश हो जाऊं तस्वीर मेरी लगा ली होगी ख़तो किताबत की जरूरत, क्यों तुम्हें महसूस होगी तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी भरम हुआ क्या, कभी तुम्हे यह लगा जो जैसे में आया , दरवाज़े पर दस्तक की, आहट कभी तो आती होगी दरवाज़े पर दस्तक की आहट कभी तो आती होगी तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी चलते चलते राहों मे, क्या अक़्सर रुक जाते हो तुम कभी किसी की सूरत मे मेरी झलक तो आती होगी भूल गए हो सब कुछ या, यादों मे कही में बाक़ी हूँ बीते लम्हो की कुछ बातें कभी तो सताती होगी ख़तो किताबत की जरूरत क्यों तुम्हें महसूस होगी तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी तुमने शायद अपनी कोई दुनिया बसा ली होगी”
Quote by Mohammed Zaki Ansari
Work
"Zaki's Gift Of Love"
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Author
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“दिल के जख़्म पर कोई मरहम नहीं लगाता, पर हर कोई सलाह देने का शौक़ रखता है।”
“ख्वाबों में जो हँसता है, असल में वही रोता है, और जो रोता है, वही दुनिया को हँसाता है।”
Source: With Love From A Blue Rock
“फ़ितूर तो तबाह करते हैं इख़्लास ही होगा जो दिल आबाद कर गया ।”
“ग़म तो बस इतना है कि तुम्हें इल्म तक नहीं, इस दिल ने तुम्हें कितने हक़ दे रखे हैं ।”
“Not by discussions nor by argument, but by lifting up Christ shall we draw men unto Him.”
“In art nothing is more secondary than the author's intentions.”
Source: Selected Non-fictions