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Kuldeep Gera Books

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“भोले बाबा, सिर्फ भगवान नहीं, बल्कि जीवन का एहसास है | पता है, इनके पास मैं सब भूल कर बच्चा सा बन जाता हु | इनको निहारता हु मैं बच्चा सा, और सुरक्षित महसूस करू इनके होने से | मुझे आज भी याद है खीरगंगा के उस मंदिर के द्रश्य | वहां पहुँच कर शिव जी के लिए चन्दन घिसने में जो ख़ुशी मिली वो शायद मैं बयां भी नहीं कर सकता | सिर्फ इतना कह सकता हु की, इनके पास मैं सब भूल कर बच्चा सा बन जाता हु”

“कुछ बिखरी सी पंक्तियाँ है मेरी | कुछ अनकहे जज़्बात है मेरे | कुछ बिखरी सी पंक्तियाँ है मेरी | कुछ अनकहे जज़्बात है मेरे | सोचता हूँ की, संभालु उन्हें या अधूरा ही छोड़ दूँ”