“कामना जब धर्म से विमुख हो जाती है, तो वह 'लोलुपता' बन जाती है।”
Source: त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह
“कामना जब धर्म से विमुख हो जाती है, तो वह 'लोलुपता' बन जाती है।”
“संप्रभुता का मूल्य चुकाकर प्राप्त किया गया वैभव, निर्धनता से भी अधिक कलंकित होता है।”