“दामिनी सी मुस्कान, व्यंग्य के समान, सुखाकर रक्त तप्त, हरता है प्राण, करता उपहास, कर पुष्प में निवास, रच विष कूट, स्वयं मधुमय मिठास, कोयल सा मधुर, झरनों का संगीत, मृत्यु का कोलाहल बन करता भीत।” DeathMysteryMetaphorPsychologicalContrastDualitySymbolismPoetry LoveDark PoetryNature Imagery Book:त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह Source: त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह
“लोग कहते मैं निशा का करती हूँ मान-मर्दन, किन्तु निशा ने स्वयं ही कर लिया मेरा वरण। निशा मेरे संग से जगमगाती है, कालिमा उसकी मेरी लौ को सजाती है। निशा मेरे संग से होती है तृप्त, मैं उसकी नंदिनी कहलाती, निशिदीप्त।” LightPoetryNightDarknessMysticismTranscendenceDualitySymbolismSelf IdentityFeminine Energy Book:त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह Source: त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह