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Tarang Sinha Books

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“यादों की सबसे ख़ास बात ये होती है कि वो कभी साथ नहीं छोड़तीं। आप चाहे कहीं भी जाएं, साथ चल पड़ती हैं। और यादें अगर अच्छी हों तो ये बहुत ही खूबसूरत घटना है।”

“खिड़कियों में कुछ तो खास होता है। चाहे आप अपनी खिड़की से बाहर देखें या बाहर से किसी खिड़की को देखें (झांकें नहीं)। चाहे वो ट्रेन की खिड़की हो या फिर किसी वीरान पड़े घर की खिड़की।”

“इस ढलते सूरज को देख रहे हो?' उसने कहा। 'मैं हमेशा उदास हो जाती हूँ इसे देखकर, ये जानते हुए कि ये सूरज कल लौटेगा, एक नई चमक के साथ। सोचो, कितना मुश्किल होता होगा उसे जाने देना जिसके लौटने की कोई उम्मीद न हो?”

“याद है अब भी वो बचपन की बेफिक्र दुनिया छोटी सी ज़िद और ढेरों खुशियां दौड़ते-भागते, खबर थी क्या कि वक़्त कुछ यूं दौड़ेगा, ज़िन्दगी कुछ यूं मुड़ेगी कि उम्र को पछाड़ तज़ुर्बा आगे, मीलों आगे होगा। अब सोचते हैं जेब में लिए फिरते थे ज़िन्दगी आलम ये है कि अब दिखाई भी नहीं देती।”