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त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह

Book by Pradyumna Kumar Tiwari · 5 quotes · Philosophy, Human Nature, Morality

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त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह Quotes

“देवी, पुष्पेंद्र इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि बुद्धिमत्ता जब प्रेम, करुणा और परोपकार की नींव से कट जाती है, तो वह केवल विनाशकारी हो जाती है। ज्ञान यदि हृदय की संवेदनाओं से न जुड़ा हो, तो वह केवल एक धारदार शस्त्र है जो चलाने वाले को भी नहीं छोड़ता। भावनाविहीन मनुष्य उस हिंसक पशु के समान है जिसके पास विवेक तो है, पर विवेक का उपयोग केवल संहार के लिए है।”

“स्वार्थ ही यदि होगा आधार, होंगे बहुविवाह व व्यभिचार, कैकेयी का होगा उद्भव, षड़यंत्र तब लेंगे आकार, विमाता से ममता का, उतरेगा यदि आवरण, राम को वनवास तथा, दशरथ का होगा मरण।”

“जब माता या पिता में से कोई एक बालक के निर्माण में अनुपस्थित हो जाता है, तब उसके भीतर का संतुलन टूट जाता है। वही संतुलन जो अर्धनारीश्वर का तत्व है। जब यह तत्व अनुपस्थित होता है, तब पुरुष केवल एक शक्तिशाली यंत्र बन जाता है और स्त्री मात्र एक सजीली वस्तु।”

“सच्ची सहिष्णुता की पराकाष्ठा कोमलता के हृदय में ही जन्म लेती है; कठोरता तो समय की पहली चोट में ही चटक जाती है। उन”