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त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह

Book by Pradyumna Kumar Tiwari · 3 quotes · Philosophy, Human Nature, Morality

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त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह Quotes

“जब माता या पिता में से कोई एक बालक के निर्माण में अनुपस्थित हो जाता है, तब उसके भीतर का संतुलन टूट जाता है। वही संतुलन जो अर्धनारीश्वर का तत्व है। जब यह तत्व अनुपस्थित होता है, तब पुरुष केवल एक शक्तिशाली यंत्र बन जाता है और स्त्री मात्र एक सजीली वस्तु।”

“किन्तु धर्मयज्ञ से होने वाली सुख-वृष्टि सदा आहुतियाँ माँगती है। सूर्य भी सरिताओं से जल माँगकर ही धन-धान्य की वर्षा करता है।”

“उन्नति, तकनीकी शक्ति और स्वतंत्रता के शिखर आकाश में अचानक नहीं उठते; वे धर्म और संस्कृति की धरती से जन्म लेते हैं, और उसी आधार के दृढ़ रहने पर ही अटल बने रहते हैं।”