Quotessence
Home / Books / त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह

त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह

Book by Pradyumna Kumar Tiwari · 2 quotes · Philosophy, Human Nature, Morality

Filter quotes by topic

त्रिकूट: धर्म का चक्रव्यूह Quotes

“इस अनिश्चित जीवन में 'विश्वास' ही आशा का वह दीप है जो समाज को जोड़े रखता है। निस्वार्थ प्रेम और पवित्र विश्वास अपराध नहीं हैं, वरन जीवन का आधार हैं।”

“प्रेम यदि निस्वार्थ हो, सीता तभी संग होगी, पूर्ण निष्ठा समर्पण से ही, ये धनु भंग होगी। संभवतः यह पवित्र प्रेम की उसी शक्ति की पराकाष्ठा थी, जिसने श्रीराम को पाँच दिवस में महासागर पर सेतु बांधने का सामर्थ्य दिया था अथवा आज फिर वही संकल्प-शक्ति प्रकट हो गयी थी, जिसने युगों पहले रघुवंशियों को अजेय बना दिया था।”