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Vandana Yadav Quotes

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Famous Vandana Yadav Quotes

“जहां रौब दिखाना हो, वहां बाराती बनकर आदमी पहुंच जाते हैं लेकिन जहां शरीर को तकलीफ देनी हो, जहां परीक्षा की सूली पर चढ़ना हो, वहां महिलाओ को आगे कर दिया जाता है। हमारी मासूम कौम पीढ़ी दर पीढ़ी इस राह पर आगे बढ़ती चली जा रही है।”

“ऐसा क्यों है कि अंधेरे में सुबह चार बजे मम्मी के साथ मैं, कुएं के ठंडे पानी से नहाने जाती हूँ। कार्तिक का महीना बहुत ठंड लिए रहता है। ऐसे में सारी तपस्या सिर्फ महिलाएं क्यों कर रही हैं? पापा और पापा की तरह सब पुरूष रजाई में क्यों सो रहे हैं? क्या उन्होंने कोई पाप नहीं किए? जवाब में परंपराओं का हवाला दे दिया जाता था। मुझे फक्र होता है उस शीक्षा पर, सवाल पूछने के अधिकार के उपयोग पर जो हमें सहज उपलब्ध था।”

“मैं देखती थी कि किस तरह मेरे गाँव की महिलाएं खेतों में काम करते हुए और ससुराल में पशुओं का ध्यान रखने में जीवन बिता देती हैं। यह पशु और खेत उनके नाम होते भी नहीं। घर की बहुएं दिन-रात बंधुआ मजदूर की तरह काम करती हैं। शादी होना यानी बिना तनख्वाह के घर, खेत में काम करने वाली मिल जाना क्योंकि गांव-देहात में महिलाएं पहनने के कपड़े भी अपने मायके से लेकर आती हैं। उस समय तक बस इतना ही शोषण समझ आता था।”